शंभू गर्ल्स हॉस्टल में, टूटा एक अरमान,
नीट पढ़े सपनों पर, छा गया श्मशान।
बेटी थी वो देश की, आँखों में थी रोश,
किसने छीना स्वप्न उसका, जलता जनता-क्रोश।
सत्ता बैठी मौन क्यों, प्रश्न खड़े हर ओर,
न्याय बिना विश्वास का, टूटे जाता छोर।
वर्दी में भले नहीं हैं, सच जिनका हथियार,
जिनमें नाम अमिताभ दास का, बनता एक पुकार।
सच की राह कठिन बहुत, काँटों भरी डगर,
छापा, दबाव, आँधियाँ — फिर भी अडिग सफर।
संसद से भी उठी आवाज़, पप्पू यादव नाम,
प्रश्नों की गूंजें बताएं, ज़िंदा है अविराम।
जेल की दीवारें कहें, सच को कैद न मान,
जनता जब जागे कभी, बदल दे हर विधान।
बुज़दिल के मुँह में दही जमा, सत्ता रही मगन,
सच की आवाज़ें दबने जा रही , चुप बैठा है जन।
Writer: Shailendra Bihari

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