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ये उम्र क्यों करते है प्यार ।
क्यों करते हम हर रोज श्रृंगार ।।

किसने बनाई है ये प्यार ।
क्या वो भी किसी का करते थे इंतजार ।।

उसने भी कभी किसी को दिया है धोखा ।
क्या हर किसी को मिलते है,धोखे का मौका ।।

क्यों देते है लोग धोखा हर रोज ।
उसके भी प्यार में कोई होगा वियोग ।।

धोख को क्यों नहीं भूल पाए ।
क्यों हर रोज उसकी यादें रुलाए ।।


लेखक :- शैलेंद्र बिहारी 



Shailendra Bihari Kavita 


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