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                                 परिचय पात्र

मेरा नाम अमरजीत मैं कक्षा 11वीं का छात्र हु, मैं शहर में रहकर पढ़ाई करता हूं। और मैं गांव से आया हूं।

दोस्त : मेरे काफी सारा दोस्त है , जिनका जिक्र मैं आगे कहानी में करूंगा ।

साक्षी : मेरी प्यारी प्रेमिका जो आगे चलकर पत्नी के रूप में नजर आयेंगे।

जीजा : इससे हम कई बार डाट फटकार खाते हुए नजर आयेंगे ।

माता पिता : माता पिता तो सही गलत सब में नर आयेंगे ।

शिक्षक : मैं चार कक्षा जाता हुं, जिसमें चार अलग-अलग शिक्षक है ।
  
गांव : जिसमें हम खेत खलियान और कुछ लोगों से बातचीत करते हुए नजर आयेंगे ।

दरभंगा : मैं दरभंगा में रहता हु , जिसमें हम आपको कुछ खरीदारी करते हुए नजर आएंगे और अपनी प्रेमिका से मुलाकात करते हुए भी नजर आएंगे । 

मैं आज दरभंगा रहने जा रहा हु और बहुत उत्साहित हूं ,
मेरे काफी सारा दोस्त कई दरभंगा तो कई पटना तो कई झंझारपुर और कई इधर उधर चले गए ।
मैं और मेरा एक दोस्त साथ में बैठे है और वो भी मेरे साथ ही जा रहे है हम दोनो साथ साथ ही रहेंगे ।

बस कंडक्टर : चलो चलो दरभंगा आगए । सभी अपना अपना सामान लेकर बारी बारी से उतर जाए ।

हम दोनो सुरक्षित लॉज पर पहुंच गए ।
                    
                                सुबह
कक्षा : आज मेरा पहली कक्षा है , मैं बहुत उत्साहित हूं सभी नए नए लड़के और लड़कियां सब का आज पहली कक्षा सभी अनजान सी लग रही है और उमंग भरी मुस्कान सब पर नजर आ रहे है ।

शिक्षक :  सभी नए चेहरे को देख कर खुद का परिचय देते हुए सभी विद्यार्थी से परिचय ले रहे है ।
और कक्षा की सभी जानकारी दिए
और कक्षा समाप्त कर दिए ।
         
                         दूसरे दिन
सुबह हो गई है और मैं सो कर उठ गया हूं अभी नया हूं
और कक्षा जल्दी जाने का मन कर रहा है ।
कुछ समय बाद मैं कक्षा पहुंच गया हूं।

कक्षा में सभी विद्यार्थी पहुंच गए हैं
अभी अभी एक लड़की आई पूरे कक्षा को एक नजर देखते हुए अपनी बेंच पर बैठ गई तभी एक नजर हमें भी देखी मेरी नजर भी उस पर पड़ी फिर वो किताब देखने लगी ।

शिक्षक आए और पहली पाठ में  पढ़ा कर चले गए ।
कक्षा समाप्त हो गए सभी विद्यार्थी बारी बारी से निकलने लगे आगे में लड़कियां सब थी वो सब पहले निकलने लगे तभी वो लड़की फिर मेरी ओर एक नजर फिर देखी मेरी नजर भी उस पर पर गई और वो कक्षा से निकल गई

                         तीसरे दिन
आज मैं कक्षा में सबसे पहले आ गया हूं और कुछ कुछ विद्यार्थी भी आने लगे है तभी वो लड़की भी आ गई और बैठ गई मेरे बेंच से आगे वाला बेंच पर फिर एक नजर हम दोनो को नजर से मुलाकात हुई
फिर हम दोनो किताब की ओर नजर डाल दिए लेकिन मुझे लगा की को लड़की मुझे पसंद करती है मैं फिर उसकी ओर देखा वो भी आचनक देखने लगी ।
मैं फिर नजर किताब की ओर किया और कुछ लिखने लगा
तभी सर आ गए सभी विद्यार्थी ने शुभ प्रभात से सर को अभिनंदन किया।
अब कक्षा का समय हो गया है सर कक्षा से चले गए दूसरे दिन की तरह सभी लड़की पहले निकल रही है तभी वो लड़की फिर से नजर मिला ली मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ की वो लड़की मुझे भी सायद चाहने लगी है।

अभी कक्षा में दोस्त कोई भी नहीं बने है ।
दो तीन लड़के ने उसे देख लिया मुझे निहारते हुए ।
वो लड़के सब मुझे दोस्त बनाना चाहते थे और बोले क्या भाई क्या चल रहे है नंबर और लिए की नही हम बोले ऐसा कुछ नहीं है।
हम जानते भी उसे नही है
लड़का : तो वो बार बार कल से आपको घूर क्यों रही है।
मैं : अरे भाई उसकी मर्जी वो जिधर चाहे घूरे मुझे उससे            क्या ?
लड़का : लेकिन भाई वो तुझे ही घूर रही थी ।
मैं : मालूम नहीं कल से गौर करेंगे तो ।
लड़का सब चला गया और मैं भी लॉज पर पहुंच गए।



अगले भाग 👉👉👉


लेखक : Shailendra Bihari 


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