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तू मंजिल है मैं किनारा ।
तू साथ दे या ना दे हमारा ।।

चल कहीं दूर चले ।
मंजिल के पीछे हम क्यों परे ।।

मत कर इधर उधर की बात ।
तो मंजिल कभी ना देगी साथ ।।

कर्तव्य करो तुम अपना आगे ।
तभी मंजिल तेरे पीछे भागे ।।

अपने कर्तव्य के लो स्मरण में ।
तभी मंजिल होगी चरण में ।।


लेखक : शैलेंद्र बिहारी 



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